कारगिल युद्ध में लद्दाख के युवाओं ने की थी सेना की मदद, इस तरह करते थे काम

कारगिल युद्ध में लद्दाख के युवाओं ने की थी सेना की मदद, इस तरह करते थे काम

लद्दाख: भारत और चीन के बीच जारी तनाव के बीच लद्दाख (Ladakh) के वीरों की कई पुरानी कहानियां सामने आ रही हैं. ZEE NEWS ने लद्दाख जाकर इन कहानियों के बारे में पता किया है और आज हम आपको वो कहानी बताएंगे जिससे आपको पता चलेगा कि कैसे लद्दाख के नागरिक भारतीय सेना की मदद करते हैं. ये कहानी 1999 के कारगिल युद्ध की है. लद्दाख के युवाओं ने इस दौरान सेना की बहुत मदद की थी. 

इन लद्दाख के नागरिकों के लिए देश सर्वप्रथम है और अपनी मिट्टी की रक्षा के लिए ये हमेशा भारतीय सेना की हरसंभव मदद के लिए तैयार रहते हैं. लद्दाख के ये ऐसे योद्धा हैं, जिनके लिए देशभक्ति से बढ़कर कुछ नहीं. जिनके लिए जाति, धर्म से बढ़कर भारतीय सेना का गौरव है. दरअसल ये वो योद्धा हैं जो 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना के पीछे चट्टान की तरह खड़े थे.

लद्दाख के लोअर लेह गांव के मोहम्मद अख्तर ने 1999 में भारतीय सेना के लिए स्वेच्छा से कई हफ्तों तक युद्ध के मैदान में मदद की थी. ये 20-20 किलोमीटर पैदल चलकर सेना को ऊंची-ऊंची पहाड़ियों पर मदद पहुंचाते थे. जुबर हिल में ये रातभर जगकर सेना तक जरूरी सामान पहुंचाते थे. 

इसी कड़ी में एक और नाम है रिग्जिन नामग्याल. 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान ये ट्रक चलाते थे. ये लेह से कारगिल तक हथियार, गोला बारूद और राशन पहुंचाने का काम करते थे. 

रिग्जिन नामग्याल को शुरूआत में युद्ध क्षेत्र में जाने में डर लगता था लेकिन जब वो ट्रक में सामान लेकर कारगिल पहुंचते थे तो वो जोश से भरपूर हो जाते थे और पाकिस्तान से बदला लेने की सोचते थे. 

इसके अलावा 64 साल के पी आंगचुक वो लद्दाखी हैं जो देश की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार रहते हैं. कारगिल में बेस कैंप तक ये तोप की गोलियां, चावल, दाल, चीनी व अन्य सामान अपने कंधों पर उठाकर ले जाते थे. 

सेना की मदद करने में महिलाएं भी पीछे नहीं थीं. रिन्छेन लामो, लद्दाख की वो महिला हैं, जिन्होंने गांवों की महिलाओं के साथ मिलकर 1999 के युद्ध के दौरान सेना के लिए खाना बनाकर भिजवाया. इनकी कोशिश रहती थी कि ऑर्गेनिक फूड सेना तक पहुंचे, जिससे लड़ाई में सेना को मदद मिले. 

वहीं भारत-चीन के विवाद के बीच लद्दाख के युवाओं का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो वो कारगिल युद्ध की तरह एक बार फिर सेना की मदद के लिए तैयार हैं. यानी कि लद्दाख के नागरिक ये कह रहे हैं कि चीन से बदला लिया जाए और ये बॉर्डर पर जाने को तैयार हैं. 

1999 के ये हीरो अब 21 साल बाद भी इसी जोश और जज्बे के साथ 2020 में चीन को सबक सिखाने के लिए गलवान के बलवानों के साथ खड़े रहना चाहते हैं. ये अपने-अपने स्तर पर LAC पर मदद के लिए आगे आ रहे हैं.

आज, चीन भी लद्दाख के नागरिकों की आवाज सुनकर जरूर डर रहा होगा क्योंकि भारतीय सेना के साथ-साथ अब लद्दाख की जनता भी चीन से मोर्चा लेने के लिए तैयार है.