पूर्वी लद्दाख के इलाकों में संघर्ष के पीछे है ये अहम वजह, जानें आंकड़े

पूर्वी लद्दाख के इलाकों में संघर्ष के पीछे है ये अहम वजह, जानें आंकड़े

नई दिल्ली: बीते कुछ सालों से पूर्वी लद्दाख (Eastern Ladakh) के कुछ संवेदनशील इलाकों में अक्सर संघर्ष की बात सामने आई है. यह हमारी गश्त प्रणाली में सुधार और बढ़ोतरी का प्रत्यक्ष परिणाम है. ज्यादातर संघर्ष के मामले कमजोरी या खराब संबंधों का संकेत नहीं है बल्कि ये इस बात का संकेत है कि भारतीय सेना अच्छे तरीके से मॉनीटरिंग कर रही है और चीजों का पता लगाकर गश्त बढ़ा रही है. जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार होता रहेगा, ये संभावनाएं बढ़ती जाएंगी. 

इस आधारभूत संरचना के निर्माण का पता लगाने के लिए,  हमें 2014 में जाना होगा. मोदी सरकार के पहले फैसलों में से एक था कि जुलाई 2014 में सीमा सड़क संगठन द्वारा LAC से 100 किलोमीटर की हवाई दूरी पर रोड नेटवर्क के निर्माण के लिए सामान्य स्वीकृति जारी करना.  

इसके बाद, इस छूट को सभी सीमा सुरक्षा संबंधी बुनियादी ढांचों जैसे सीमा चौकियों, फ्लडलाइट्स, फ़ेंसिंग इत्यादि और एमएचए के पैरा मिलिट्री संगठनों द्वारा निष्पादित सभी परियोजनाओं के लिए बढ़ा दिया गया है.

यह यूपीए सरकार द्वारा उठाए गए कदम के विपरीत है, जहां विभिन्न कारणों से इस तरह के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को ब्लॉक करना एक आदर्श था.  अक्सर देरी फ्लिप फ्लॉप के कारण पर्यावरणीय मंजूरी पर होती थी, खासकर जयंती नटराजन और जयराम रमेश जैसे मंत्रियों के नेतृत्व में. विशेष रूप से, 2004-14 की लगभग आधी अवधि के लिए, तत्कालीन प्रधानमंत्री ने खुद पर्यावरण मंत्रालय का प्रभार संभाला. 

इसी तरह, मोदी सरकार ने डीजी को शक्तियां सौंपीं और 66 इंडो-चाइना बॉर्डर रोड के निर्माण का रास्ता साफ कर दिया. इससे पहले, हर मंजूरी रक्षा मंत्रालय के पास आती थी. इन शक्तियों को बाद में सीमा सड़क संगठन में मुख्य अभियंता स्तर तक के अधिकारियों को सौंप दिया गया. 

सरकार ने 2017 - 2020 के बीच बड़े पैमाने पर आधुनिक निर्माण उपकरणों की खरीद जैसे अन्य महत्वपूर्ण कदम उठाए. इसने 2017 के बाद से चिनूक का उपयोग करते हुए 2017 से निर्माण उपकरण और सामग्री का एयरलिफ्ट भी बढ़ाया. नतीजे कुछ इस तरह हैं. 

भारत-चीन बॉर्डर रोड्स 

फॉरमेशन कटिंग- 
2008-17: 230  किमी/साल
2017-2020: 470 किमी/साल

सरफेसिंग- 
2008-17: 170 किमी/साल
2017-2020: 380 किमी/साल

टनल निर्माण- 
2008-14: 1
2014-2020: 6, (योजना के तहत अतिरिक्त 19 सुरंगें)

पूरे हुए ब्रिज
2008-14: 7270 m
2014-20: 14450 m

पूरी हुईं सड़कें
2008-14: 3610 किमी
2014-20: 4764 किमी

बजट में वृद्धि:
2008-16: 3300 करोड़ और 4600 करोड़ के बीच
2017-18: 5450 करोड़
2018-19: 6700 करोड़
2019-20: 8050 करोड़
2020-21: 11800